आशिम पुरकायस्थ को लोकल ने दिलाई अंतरराष्ट्रीय पहचान

नई दिल्ली, 22 अगस्त (आईएएनएस)। साल 2014 में जब दिल्ली के कलाकार आशिम पुरकायस्थ ने राष्ट्रीय राजधानी की विभिन्न सड़कों से पत्थर इकट्ठा करना शुरू किए थे, तो उन्हें इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि उनका शेल्टर नाम का यह आर्ट वर्क 58 वें वेनिस बिनेल में भारतीय खेमे का हिस्सा होगा।

पुरकायस्थ कहते हैं, दिल्ली की सड़कों से पत्थर उठाते समय आइडेंटिटी उनके विचार के केंद्र में थी।

वेनिस में अपने काम को मिली उत्साहजनक प्रतिक्रिया को याद करते हुए कलाकार ने कहा, जहां शेल्टर को फर्श पर प्रदर्शित किया गया था और वहीं इसका दीवार पर बना कैनवास शीर्षकहीन था। इसके बाद भी प्रदर्शनी के उद्घाटन के दौरान दर्शकों की प्रतिक्रियाओं को देखना दिलचस्प था - यह एक अतुलनीय अनुभव था।

पुरकायस्थ अपने गांधी/मैन विदाउट स्पेक्स जैसे कामों के लिए जाने जाते हैं। वे कहते हैं, हालांकि, इस महामारी के कारण बहुत कुछ हो रहा है, जैसे लॉकडाउन, माइग्रेशन और विरोध प्रदर्शन आदि। ऐसे में यह पहली बार है जब हमारे पास गांधी का कोई उल्लेख या संदर्भ नहीं है।

वे अपने काम के जरिए सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को उजागर करने के लिए भी मशहूर हैं। स्थानीयता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि अब कोविड-19 के बाद कलाकारों और प्रदर्शकों दोनों को ही वर्चुअल माध्यम पर अधिक निर्भर होना होगा।

उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के इस समय का उपयोग वे अपने भविष्य के काम के लिए सामग्री इकट्ठा करने में कर रहे हैं।

वहीं सरकार को लेकर उन्होंने कहा, सरकार कोविड-19 की घटती मृत्यू दर को दिखाकर अपनी सफलता जता रही है। जबकि लाखों लोग बेरोजगार हो गए हैं, हमने प्रवासियों को पैदल घर जाते देखा है और फिर से बड़ी तादाद में मजदूर शहरों में काम के लिए वापस आने की सोच रहे हैं। ऐसे कई मामले हैं जिनका हल निकाला जाना चाहिए।

एसडीजे/जेएनएस



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Local gets international recognition for Ashim Purkayastha
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