कोविड का इलाज कर रहे सेंटर्स की हकीकत , मिल रही शिकायतें

डिजिटल डेस्क जबलपुर । सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल में मरीजों को इलाज से कोई शिकायत नहीं है, लेकिन गंदगी के कारण मरीज वीडियो बनाकर सीधे कलेक्टर को शिकायत कर देते हैं। यहाँ अधिकतर गंभीर मरीज रखे गए हैं। अनेक ऐसे मरीज हैं, जो ज्ञानोदय या अन्य जगह से यहाँ आना चाहते हैं, लेकिन उन्हें नहीं लाया जा रहा। यहाँ इलाज नि:शुल्क है, इसी वजह से लोग यहाँ आना चाहते हैं। पुराने मेडिकल कॉलेज के 920 बिस्तरों पर सेन्ट्रल ऑक्सीजन लाइन का काम चल रहा है, पर बाकी बीमारियों के मरीज कहाँ जाएँगे? इसका जवाब प्रशासन के पास नहीं है। 
सुखसागर मेडिकल कॉलेज 
कहने को तो सुखसागर मेडिकल कॉलेज अस्पताल है, लेकिन इसे  कोविड केयर सेंटर बना दिया गया है। यहाँ माइल्ड लक्षण वाले मरीज रखे जा रहे हैं या फिर ऊँची पहुँच वाले कोरोना पीडि़तों को रखा जाता है। शहर से दूर होने के कारण कुछ मरीज यहाँ नहीं आना चाहते तो कुछ बेहतर सुविधाओं की जानकारी पाकर यहाँ आने प्रशासन से अनुरोध करते रहते हैं, पर उनकी कोई सुनवाई नहीं है। ऑक्सीजन लाइनयुक्त 300 बिस्तरों के अलावा रेस्ट हाउस, गेस्ट हाउस, हॉस्टल भी हैं। यहाँ चिकित्सा व्यवस्था प्रशासन के हाथों में है, जो गंभीर मरीजों को नहीं लेते हैं।
बदइंतजामी हावी है
रांझी स्थित ज्ञानोदय आवासीय विद्यालय को क्वारंटीन और आइसोलेशन सेंटर बनाया गया है, लेकिन यहाँ बदइंतजामी हावी है। मरीज तो यहाँ रहना ही नहीं चाहते हैं, गंदगी, मधुमक्खी के छत्ते, पीने के पानी का अभाव, टेंट हाउस के गंदे गद्दे, स्टाफ के अभाव की लगातार शिकायतें आ रही हैं। मरीज को ये भी डर है कि अगर उसकी हालत रात-बेरात बिगड़े तो उसे मेडिकल तक कैसे ले जाया जाएगा? यहाँ जो स्टाफ है वो सेंटर में अंदर आना ही नहीं चाहता है। प्रशासन पर आरोप लग रहे हैं कि खरीदी के चक्कर में ऐसा असुविधाजनक केन्द्र बनाया गया है।
15 से 25 हजार प्रतिदिन प्रति बिस्तर
बाकी सेंटर अभी जहाँ खुले नहीं हैं, वहीं प्राइवेट अस्पतालों में मरीज रखने तो प्रारंभ हो गए हैं पर उनका रेट 15 से 25 हजार प्रतिदिन प्रति बिस्तर है। अगर मरीज को वेन्टिलेटर लगता है तो उसके चार्जेस अलग से लिए जाएँगे। स्वाभाविक है कि यहाँ वही मरीज आएँगे, जो आर्थिक रूप से सक्षम हों। हालाँकि प्राइवेट हॉस्पिटल्स में मरीज रखना अभी प्रारंभ ही हुआ है पर शिकायत आ रही है कि मेडिकल स्टाफ या तो पर्याप्त है नहीं या फिर अप्रशिक्षित। एकाध मरीज को दूसरे अस्पताल में शिफ्ट भी किया गया है। बहरहाल यह बहुत शुरूआती दौर है।



.Download Dainik Bhaskar Hindi App for Latest Hindi News.
.
...
Reality of centers treating Kovid, getting complaints
.
.
.


from दैनिक भास्कर हिंदी https://ift.tt/3glNVkF
via IFTTT

No comments